भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 की शुरुआत निवेशकों के लिए भारी झटके के साथ हुई। कारोबार शुरू होते ही बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली और कुछ ही देर में बीएसई सेंसेक्स 900 अंकों से अधिक टूट गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी 250 अंकों से ज्यादा फिसल गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब तीन लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। वैश्विक संकेतों की कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार का माहौल पूरी तरह बदल दिया। सुबह से ही बिकवाली का दबाव शुक्रवार सुबह बाजार कमजोर संकेतों के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली और बिकवाली शुरू कर दी। सुबह लगभग 10:20 बजे बीएसई सेंसेक्स 902 अंक यानी करीब 1.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,489 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं एनएसई निफ्टी-50 भी 256 अंक यानी लगभग 1.07 प्रतिशत टूटकर 23,613 के स्तर तक पहुंच गया। बाजार खुलने के समय भी कमजोरी साफ दिखाई दी। सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,391 के मुकाबले 75,708 पर खुला, जबकि निफ्टी 23,870 के मुकाबले गिरकर 23,666 के स्तर पर कारोबार शुरू हुआ। शुरुआती घंटे में ही बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि अधिकांश सेक्टर लाल निशान में पहुंच गए। बैंकिंग शेयरों ने दिखाई मजबूती जहां एक ओर लगभग पूरा बाजार दबाव में नजर आया, वहीं बैंकिंग सेक्टर ने राहत की तस्वीर पेश की। बैंक निफ्टी में खरीदारी देखने को मिली और यह करीब 1.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 58,046 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। निजी और सरकारी बैंकों के कुछ प्रमुख शेयरों में आई मजबूती ने बैंकिंग इंडेक्स को सहारा दिया। हालांकि यह मजबूती पूरे बाजार की गिरावट को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। क्यों टूटा बाजार? विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण एक साथ सामने आए हैं। सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई। इसके अलावा अमेरिकी शेयर बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी भारतीय निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। विदेशी बाजारों में आई गिरावट का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। वहीं कई बड़ी कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, जिससे निवेशकों का विश्वास और कमजोर हो गया। रुपये पर भी बढ़ा दबाव शेयर बाजार में कमजोरी के साथ-साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। डॉलर के मुकाबले रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आयात बिल बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका सीधा असर रुपये की मजबूती पर पड़ता है। लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई। बाजार में "रिस्क-ऑफ" माहौल देखने को मिला, जिसमें निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते नजर आए। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा हलचल बाजार में गिरावट के बीच कुछ स्मॉल और मिडकैप शेयरों ने शानदार प्रदर्शन भी किया। वेलोरा इम्पैक्ट, धाब्रिया पॉलीवुड और एशियन ग्रेनाइटो इंडिया जैसे शेयरों में 19 से 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इन कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की खरीदारी जारी रही। वहीं दूसरी ओर कई बड़े शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। सीआईई ऑटोमोटिव इंडिया सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों में शामिल रहा और इसमें करीब 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा एसआरएफ, वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज, अदाणी ग्रीन एनर्जी और इंडसइंड बैंक के शेयरों में भी अच्छी-खासी बिकवाली देखने को मिली। तकनीकी संकेत भी चिंता बढ़ा रहे तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार सेंसेक्स अपने 50-दिवसीय मूविंग एवरेज के नीचे फिसल गया है, जिसे बाजार में कमजोरी का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। यदि आने वाले कारोबारी सत्रों में भी यह स्थिति बनी रहती है तो बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही इंडिया VIX, जिसे बाजार का "डर सूचकांक" कहा जाता है, चार प्रतिशत से अधिक बढ़कर 14 के करीब पहुंच गया। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है। निवेशकों को क्या करना चाहिए? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में घबराकर निवेश संबंधी फैसले लेना उचित नहीं होता। मौजूदा गिरावट का बड़ा कारण वैश्विक परिस्थितियां और भू-राजनीतिक तनाव हैं, जिनमें समय के साथ बदलाव संभव है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और जल्दबाजी में खरीद या बिक्री से बचना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजे भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। इसलिए निवेशकों को बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए और सोच-समझकर ही कोई निवेश निर्णय लेना चाहिए। डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसे निवेश सलाह के रूप में न लें। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।